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मैंने लोहे का चाँद निगल लिया / शी लिज़ी / सौरभ राय

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मैंने लोहे का चाँद निगल लिया
वे इसे कील कहते हैं
मैंने इस औद्योगिक नाले को
इन बेरोज़गारी के दस्तावेज़ों को निगल लिया

मशीनों की बन्दगी करते
युवा समय से पहले मरते हैं
मैंने शोर शराबे और बेबसी को निगल लिया
मैंने पैदल पुलों को, ज़ंग लगी ज़िन्दगी को निगल लिया

बस अब और नहीं निगल सकता
जो निगला है वो अब मेरे गले से फूट कर
मेरे पूर्वजों की ज़मीन पर फ़ैल रहा है
एक शर्मनाक कविता के रूप में।

मूल चीनी भाषा से अनुवाद : सौरभ राय