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मोती बी०ए० / परिचय

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भोजपुरी कवि एवं गीतकार मोती बी0ए0 (मोतीलाल उपाध्याय) का जन्म 1 अगस्त 1919 को गांव-बरेजी, बरहज, देवरिया में हुआ था । उनके लिखे गीत` असो आइल महुआ बारी में बहार सजनी´ और `सेमर के फूल´ जनमानस में इतने लोकप्रिय हुए कि पूरे पूर्वांचल में लोक कलाकारों ने इन्हें आदर के साथ गाया । मोती बी0ए0 की प्रमुख रचनाएं थीं - सेमर के फूल, कवि भावन मानव, पायल छम-छम बाजे,मोती के मुक्तक, अस के गुहर, राशन की दुकान, मेघदूत का पदानुवाद, रविबेनएजरा का अनुवाद, लव एंड ब्यूटी, अंग्रेजी कविताओं का संग्रह । 1947 से 1955 तक उन्होंने मुंबई फिल्मी दुनिया में काम किया । 1955 से 1980 तक स्थानीय श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज, बरहज में प्राध्यापक रहे । मोती बी0ए0 लम्बे समय से अस्वस्थ होने के कारण बिस्तर पर मरणासन्न पड़े रहे और अंत में उनकी मृत्यु 18 जनवरी 2009 को हुई ।

मोती बी0ए0 को हिन्दी फिल्मों में भोजपुरी गीतों के प्रचलन का श्रेय दिया जाता है । उन्होंने `कठवा के नइया बनइहे रे मलहवा, नदिया के पार दे उतार, `छपक-छपक चले तोरी नइया रे मलहवा आइल पुरुवइया के बहार´ और `मोरी रानी हो तू ही मेरा प्राण आधार´ जैसे चर्चित गीत लिखे । मोती बी0ए0 ने नदिया के पार (पुरानी) के अलावा सुभद्रा, भक्त ध्रुव, सिंदूर, साजन, राम विवाह, सुरेखा, हरण, ममता, ठकुराइन, गजब भइले रामा,चम्पा चमेली, फिल्मों में गीत लिखे । 1984 में प्रदर्शित फिल्म-गजब भइले रामा में अभिनय भी किया हालाँकि उन्हें प्रसिद्धी ’नदिया के पार’ से मिली ।