भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मोती लगल सेजिया, मुँगे लगल सेजिया / मगही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मोती लगल सेजिया, मुँगे[1] लगल सेजिया।
चाँद देलन जोतिया, सुरुज देलन मोतिया॥1॥
ताहि पर[2] सुतलन दुलहा दुलरइता दुलहा।
आइ गेलइन[3] हे हुनुँके[4] सुखनीनियाँ[5]॥2॥
नीनियाँ बेयागर[6] दुलहा तानलन[7] चदरिया।
दुलहिन सूतल मुख मोर[8] सबुज सेजिया॥3॥
अब न जायब हम परभु जी के सेजिया।
उनखा[9] पियार[10] हकइन[11] सबुज सेजे नीनियाँ॥4॥

शब्दार्थ
  1. मूँगा, एक रत्न विशेष
  2. उस पर
  3. आ गई
  4. उसको, पति को
  5. सुख की नींद
  6. व्यग्र, बेचैन
  7. तान लिया
  8. मुख मोड़ कर
  9. उन्हें
  10. प्यारा
  11. है