भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

म्हानै नुवां नीं जाण कलाळी / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

 (भवानीसिंह राठौड़ खातर)

म्हानै नुवां नीं जाण कलाळी
म्हैं जीवां थारै ताण कलाळी

जावै होश तो जावो भलांई
म्हैं राखां थारो माण कलाळी

म्हैं नटां कोनी तूं थकै कोनी
किण री टूटै अब बाण कलाळी

आ तो साव फीकी-सी लागै
पैलै तोड़ री छाण कलाळी

तूं नुंवी ऐ बोतल प्याला नुवां
हुई सांस नुंवी अटाण कलाळी