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म्हारी गुदली हथेली मं छालो पड़ गयो /राजस्थानी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

गौरी की नर्म हथेली पर छाले पड़ गए हैं, वह काम नहीं कर सकती...पर उसे जयपुरिया लहरिया दुपट्टा व मधुपुरिया घाघरा तो चाहिए...
 
म्हारी गुदली हथेली मं छालो पड़ गयो
मधुआ म्हारो जी!

मैं पलो नहीं काटूँ सा
घास नहीं खूदे से महं सूँ
परले नहीं कटे से
म्हारी भोली सूरत
काली पड़ गी
मधुआ म्हारो जी

रखड़ी भी ले लो थे
थारी बेगडी भी ले लो
म्हाने जेपुरिया लहरयो मंगवादो
मधुआ म्हारो जी!

जुटड़ा भी ले लेलो जी
थारा बिछुआ भी ले लो
म्हाने मधुआपुर सूं घाघरा मंगवादो
मधुआ म्हारो जी!