भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

यह उत्कट जिप्सी प्रेम / मरीना स्विताएवा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

विरह का यह उत्कट जिप्सी प्रेमी
मिलने पर छिटक जाता है दूर
हाथों पर गिर आता है माथा
अंधकार निहारते सोचती हूँ मैं :

हमारी चिट्ठियों को खोदता
कोई भी नहीं पहुँच सका इस गहराई में,
किस हद तक हम रहे हैं आस्थाभंजक
यानी किस हद तक अपने-अपने प्रति आस्थावान !

रचनाकाल : अक्तूबर 1915

मूल रूसी भाषा से अनुवाद : वरयाम सिंह