भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

यार कब दिल की जराहत पे नज़र करता है / इनामुल्लाह ख़ाँ यक़ीन

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

यार कब दिल की जराहत पे नज़र करता है
कौन इस कूचे में जुज़ तेरे गुज़र करता है

अब तो कर ले निगह-ए-लुत्फ़ कि हो तोशा-ए-राह
कि कोई दम में ये बीमार सफ़र करता है

अपनी हैरानी को हम अर्ज़ करें किस मुँह से
कब वो आईने पे मग़रूर नज़र करता है

उम्र फ़रियाद में बर्बाद गई कुछ न हुआ
नाला मशहूर ग़लत है कि असर करता है

यार की बात हमें कौन सुनाता है ‘यक़ीं’
कौन कब गुल की दिवानों को ख़बर करता है