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युद्ध-शांति के करूण कहानी सें भरलोॅ है माँटी / नवीन चंद्र शुक्ल 'पुष्प'

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युद्ध-शांति के करूण कहानी सें भरलोॅ है माँटी
बलिदानी के बलिदानोॅ सें छै भरलोॅ है माँटी
गरम-गरम अभिमानी लहू सें छै रगलोॅ है माँटी
रं-रं सुन्दर रंगोॅ सेॅ रंगलोॅ छै है माँटी
माँटी हाथ लगाबोॅ देथौं सोना तोरा माँटी
आपनोॅ भाल लगाबोॅ पाबन खुशबू भरलोॅ माँटी
परम पुनीत छै ई धरती पर मातृभूमि के माँटी
अखंडता के कसम उठावोॅ छूवी केॅ है माँटी

सुक्खोॅ-दुक्खोॅ में छलकी-छलकी आवै छै पानी
निर्लज्जोॅ केॅ रहै नै तनियो छै आँखोॅ में पानी
जों दुश्मस देशोॅ पर चढ़तै देवै पिलाय केॅ पानी
लोहें लोहोॅ काटै छै भैया चढ़लोॅ लोहा पर पानी
पनघट में ऐतेॅ गोरी के इज्जत छेकै पानी
जों भसकी जाय घैलोॅ, गोरी हौय छै पानी-पानी
झमझम-झमझम बरसी बदरिया राखै सबके पानी
आपनोॅ कुलोॅ रोॅ पानी राखोॅ जोगोॅ देश के पानी