भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

युद्ध के कब्रलेख / रुडयार्ड किपलिंग / तरुण त्रिपाठी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

१- एक बेटा..
―――
मेरा बेटा किसी चुटकुले पर हँसता हुआ
मार दिया गया था.
काश कि मैं जानता
क्या था वह,
और शायद वह इस वक़्त मेरे काम आता
जब मेरी दुनिया में
कम हैं चुटकुले..

२- एक इकलौता बेटा..
―――
मैंने क़त्ल किया है और कोई नहीं
बस अपनी माँ का
वह(दुआ देती हुई अपने क़ातिल को)
मेरे लिए उपजे दुख के कारण मरी..

३- एक नौकर..
―――
हम दोनों साथ थे जब युद्ध शुरू हुआ
वह मेरा नौकर था,
और वह आदमी बेहतर था..

४- फ्रांस में हिंदू सिपाही..
―――
यह शख़्स अपने देश में किसकी आराधना करता है हमें नहीं पता
हम आराधना करते हैं इसके बहादुरी के सम्मान में अब अपने देश में..

५- अज्ञात महिला लाश..
―――
बेसिर, बिना पाँव और हाथ के
भयानक रूप में पड़ी मैं ज़मीन पर
मैं प्रार्थना करती हूँ कि सभी औरतों के बेटे
समझें कि मैं एक वक़्त माँ थी..

६- स्थानीय भिश्ती..
―――
प्रॉमिथियस देवलोक से आग लाया था इंसानों के लिए
यह यहाँ पर पानी लाया करता.
देवलोग उद्विग्न हैं―अब, जैसे तब थे,
और नहीं टिकने दिए इसे यहाँ..

७- वह निद्राग्रस्त चौकीदार..
―――
बेईमान थी वह चौकसी जो मैंने की: अब मुझे कुछ नहीं करना
मैं मारा गया था क्योंकि मैं सोया था: अब मारा जा चुका हूँ और सोया हूँ
अब कोई व्यक्ति न आये मुझे झिड़कने; किसी भी बेईमान निगरानी पर―
मैं सोया हूँ क्योंकि मुझे मार दिया गया है. उन्होंने मुझे मारा क्योंकि मैं सोया था..

८- गोला-बारूद से हीन तोपख़ाने..
―――
अगर कारख़ाने में कोई हमारे लिए विलाप करे,
उससे कहना
हम मरे क्योंकि कामगारों ने छुट्टी रखी..

९- वह आज्ञाकारी..
―――
रोज़, भले कोई कान शामिल नहीं होते
मेरी प्रार्थना उदय होती थी
रोज़, भले अग्नि नहीं उतपन्न होती
मैं अपना अर्पण करता था
भले मेरा अंधेरा नहीं हटा
भले कभी मुझ पर मुश्किलें कम न हुईं
भले ईश्ववर ने मुझे कुछ उपहार नहीं दिया
फिर भी
फिर भी, मैंने हमेशा ईश्वर की सेवा की!..

१०- सैलोनिकी क़ब्र..
―――
मैंने देखे हैं हज़ारों दिन
बाहर निकलना और रेंगते रहना रातों में
कछुए सी चाल में.
अरे मैं भी करता हूँ ऐसा ही.
यह ज्वर है, लड़ाई नहीं―
समय है, न कि युद्ध―जो मारता है..

{1915 में सैलोनिका भेजी गई सेना को 1918 तक ख़ास सक्रिय लड़ाई में भाग नहीं लेना पड़ा था.. पर 1917 में फैले मलेरिया के कारण 1 लाख जवानों में से 63 हज़ार के करीब जवान अस्पतालों में भर्ती दर्ज़ हुए..}