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युवा कवियों से / निकानोर पार्रा / उज्ज्वल भट्टाचार्य

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लिखो, जैसा तुम चाहते हो ।
किसी भी शैली में, जो तुम्हें पसन्द हो ।
 
पुल के नीचे से
काफ़ी ख़ून बह चुका
इस यक़ीन के चलते
कि एक ही रास्ता सही है ।

कविता में
सब कुछ जायज़ है ।

लेकिन
उसकी भी एक शर्त है,
तुम्हें ख़ाली पन्ने को बेहतर बनाना है ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : उज्ज्वल भट्टाचार्य