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यूँ को राज रखो देवता / गढ़वाली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

यूँ को राज रखो देवता,
माथा भाग दे देवता!
यूँ का बेटा-बेटी रखो देवता,
यूँ का कुल की जोत जगौ देवता।
यूँ का खाना जश दे,
माथा भाग दे देवता!
यूँ की डाँडो काँठ्यों[1] मा,
फूँलीं रौ फ्योंली[2] डंड्यौली
यूँ कि साग सवाड़ी,
रौन रोज कलबली[3]
धरती माता सोनो बरखाओ,
नाजा[4] का कौठारा[5] दे,
धन का भंडारा दे।

शब्दार्थ
  1. चोटी
  2. एक फूल
  3. एक फूल
  4. अनाज
  5. कोठार