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राज बदळियां के होसी / गजादान चारण ‘शक्तिसुत’

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कांई फरक पड़ै कै राज कीं रो है ?
राजा कुण है अर ताज कीं रो है ?
फरक चाह्वो तो राज
नीं काज बदळो !
अर भळै काज रो आगाज
नै अंदाज बदळो !
फकत आगाज ‘र अंदाज ई नीं
उणरो परवाज बदळो !
आप - आप रा साज बदळो
न्यारा -न्यारा नखरा अर नाज बदळो !
इत्तो बदळ्यां पछै चाह्वो
तो राजा बदळो
चाह्वै राज बदळो‘र
चाह्वै समाज बदळो ।
पत्तै री बात आ है कै
खुद बदळियां बिना
राजा अठीनलां म्हूं बणो‘र भलां उठीनलां म्हूं
बो रामू हुवो भलां सलामू !
आपां तो भोळी-ढाळी भेडां हां
कतरीजणों ही आपणों नसीब
आपां नै तो ठारी में ठिठुरणों पड़सी !
अर आपणी लाणी रो लूंकार
उडासी सरदी लफंगां री
का उणां रै लाडलां री !
जणां कह्वूं कांई फरक पड़ै कै
कतरणी वाळो हाथ कीं रो है,
कुणसै मजहब रो अर जात कीं रो है ?
देखो ! राजा राम हुवै भलां ई रावण
आं री‘र बां री एक ई भावण
आपां सगळा तो सीता हां !
सीधी‘र सतवंती सीता
आपणी गत तो आपां जाणां
जुगां-जुगां सूं पिछाणां - पिताणां !
हाँ ! आ और बात है कै
भेस बदळियां आपणी पिछाण शक्ति घट ज्यावै !
अर जै आपां ओळख भी ल्यां तो
अै सैं मूंढै नट ज्यावै !
    राजा रावण आवै तो छळ‘र उठाल्यै
अणजाण खूंटै रै बांध‘र बिठाद्यै
    अर जे आवै राम तो
सत रा परीक्षा रै नाम माथै
आग में कुदावै , सागीड़ा तपावै
छेकड़ कुंदण री नामिंद खरी उतरियां भी
जमीं में गडणों पड़सी !
म्हनै बताओ आपां खातर दूसरो कुण लड़सी ?
जणां क्यांरो रोणो-धोणों अर क्यांरी मौज
आपणै तो सदीनों बो ई गेलो‘र बै ई खोज !
राजा भलांई पांडव बणो‘र भलांई कोरव
 भंडीजण सारू ई बण्योडो है आपणाळो गौरव
आपणी गत तो द्रोपदी जैड़ी है
कौरव बण्या तो द्वैष साथै केस खींचसी
इज्जत री साड़ी उतारसी
ढकीढूमी लाचारी, बेबसी अर गरीबी नै
करसी चोड़ै-चौगान उघाड़ी।
अर जे बणग्या पांडव तो पछै
सशरीर जूअै री भेंट चढणों पड़सी
धरती तोलणियां जोधारां अर धर्मावतारां री
असली ओळखांण सूं टूटसी थारो भरम
ईं वास्तै कह्वूं विकल्प नहीं संकल्प साधो !
सफलता तो सफलता ही है
ईं रो कोई विकल्प नीं है अर
खुद मरियां बिना कठै ई कल्प नीं है।
कांईं कह्यो हिन्दू! अर आप मुसलमान !
अरै भोळां ! फेरूं विकल्पां में फंसग्या
हिन्दू हुवो भलां ई मुसळमान
राजा बण्यां पछै
आपां सगळा बां सामी ल्हासां हां ल्हासां !
हिन्दू हुयो तो राम नाम सत
कैंवतो चिता में बाळ देसी
अर मुसळमान बण्यो तो
कलमां पढसी‘र कर देसी
कब्र में दफन।
जणां ईं कह्वूं
भाई-भाई आपस में झगड़ो मती
पराई बंदूक नै
खुद रो खांधो देय‘र लड़ो मती
 थां नै ठा है‘र हुंती आई है
आगै भी बियां ई होसी
जणां सोचो !
राज बदळियां के होसी।
राजा मरद हुवो भलांई लुगाई हुवै
राज हाथ आतां ईं
सगळा रा सगळा कसाई हुवै।
अर आपां ! आपां तो
गरभवास रै घणै अंधकार नै
लोक रै उजास री चाहत लियां
हंसता-हंसता धक्को देवणियां
कन्या भ्रूण हां !
जकां री किस्मत में
बस एक ई बात है अर बा है
देह धार्यां पै‘ली देही रो त्याग
अस्तित्व में आयां पै‘ली उणसूं विराग
पछै बोलो ! किण सूं द्वैष,
क्यां री राग अर कीं रो अनुराग।
जे राजा मरद हुयो तो
आपरै चेहरै माथै चिंता री लकीरां बणावतो
लम्बी निसासां रा नाटक करसी अर
‘म्हारै स्सारै कोनी’ कै‘य‘र होसी निरवाळो
अर जे हुई लुगाई तो
बा आपरै अंतस री ऊँडी पीड़ रो हवालो देती
अभावां रो रोजणों रोती
खुद री मजबूरी रै नाम माथै
कर देसी आप रै अश रो उत्सर्ग।
अबै थेई बताओ !
ई आफत रो अंत कांईं है ?
का जनता अर लुगाई
नाम ई मरबा ताईं है ?
अर जे मरणों ई है तो पछै
घुट-घुट अर डर-डर क्यूं ?
सामनूं मांडो !
सच नै अंगेजो अर
कर द्यो हेलो
कै अबै आ जनता अर औरत भेड कोनी
जकी चुपचाप पगां तळै दबीजी कतरीजै
अर कोनी अबै आ सीता का द्रोपदी
जक्यां होम दी आपरी व्हाली जिंदगाणी
कुळ री काण सारू
का मोट्सारां रै माण सारू !
अबै आ जनता फकत जनाजो भी कोनी
जकी नै चाह्वै तो जमीं में गाडो अर
भांवै ठूंठां चाढो !
भलां ईं ! ईं ल्हास नै
भूत बणणों पड़ै‘र
भलांईं जिन्न !
पण अबै आ कीं नै ई माथै नीं चढावैली
बरसां सूं अमुझ्योड़ी
अबै करवट बदळैली,
बरड़ावैली,
बड़बड़ावैली ।