भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रात के न्यून घण्टे / रोके दाल्तोन / राजेश चन्द्र

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

फ़रिश्तों पर मेरा यक़ीन नहीं है
लेकिन चन्द्रमा अब मर चुका है मेरे लिए ।
ख़त्म हो चुका है शराब का आख़िरी प्याला भी
जबकि मेरी प्यास कम नहीं हुई अभी ।

'ब्लू ग्रास’ भटक गया है अपने रास्ते से
अपने बादबानों से दूर जा रहा है वह ।

तितली अपना रंग पक्का कर रही है
आग पर, जो कि राख़ से बना है ।

सवेरा कुपित हो रहा है
ओसकणों और निस्तब्ध पक्षियों पर ।

अपनी नग्नता पर मुझे शर्म आ रही है
मैं असहाय हूँ किसी बच्चे की तरह ।

तुम्हारे हाथों के बग़ैर
मेरा यह दिल
मेरे ही सीने में मेरा दुश्मन है ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : राजेश चन्द्र