भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

रामजी री कृपा सूं / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

राम- राम… राम- राम… राम- राम…
अटूट सुणीज्या करतो
एक ई सुर
सरगां कानी मूंडो कर बैठ्या
        दादी-सा रै मूंडै सूं
पण जद सूं
परदै माथै आवण लाग्या है रामजी
रामजी री किरपा सूं सूझै कोनी
तो ई सगळां सूं आगै बैठै दादी सा
करै अरदास-
पड़पोतै रो मूंडो देख लूं
पछै भलांई
उठाय लीजो रामजी !

हाथ जोड़ै
धोक देवै
ज्यूं ई
परदै सूं पाछा पधारै रामजी
रामजी री किरपा सूं पाछो शुरू हुवै
अटूट सुर एक
राम- राम… राम- राम… राम- राम…