भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रामेसर बदलै क्यू नीं / राजेन्द्र देथा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

म्हैं जद छोटा थकां हा
म्हानै मांगीलाल गुरूजी
एक बात हमेशा केंवता कै-

"बेटा दुनिया रोज बदलै"

अबै जद कदैई मिलसी गुरूजी
म्हैं वां'सू एक बात जरूर पूछूंला-

"गुरूजी औ जेकेलोन आगै बण्योडै़ फुटपाथ
अर फुटपाथ माथै सूत्योत्डौ़ ओ रामेसर बदलै क्यूं कोनी?