भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

रिमझिम रिमझिम घन घिर अइहो / पवन कुमार मिश्र

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रिमझिम-रिमझिम घन घिर अइहो
मोरी जमुना जुड़इहें ना।

मद्धिम-मद्धिम जल बरसइहो
मोरी जमुना अघइहें ना।

कदम के नीचे श्याम खड़े हैं
मुरली अधर लगाए

बंसिया बाज रही बृंदाबन
मधुबन सुध बिसराए

हौले-हौले पवन चलइहो
मोरी जमुना लहरिहें ना।

रिमझिम-रिमझिम घन घिर अइहो
मोरी जमुना जुड़इहें ना ।

रस बरसइहो बरसाने में
भीजें राधा रानी

गोपी ग्वाल धेनु बन भीजें
भीजें नन्द की रानी

झिर-झिर झिर-झिर बुन्द गिरइहौ
मोरी जमुना नहइहें ना।

रिमझिम-रिमझिम घन घिर अइहो
मोरी जमुना जुड़इहें ना।