भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रिश्ते-1 / निर्मल विक्रम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ये कँटीले रिश्तों की झाड़ियाँ
बिच्छुओं के डंक सिर्फ़
लकीरें बनाती हैं
विषबुझी लकीरें हैं
घुटन में घुटती हैं
निराश
न सुबह अपनी
रातें भी पराई हैं
सोचों में उलझनें डाले
कसती हैं मोड़ कर
ये रिश्तेदारियाँ

मूल डोगरी से अनुवाद : पद्मा सचदेव