भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

रिश्ते-3 / निर्मल विक्रम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कभी-कभी खाया-पिया मनुष्य
अचानक ही हो जाता है
ख़ाली
एकदम अकेला
कभी-कभी रिश्ते बन जाते हैं
बोझ
कंधे पर टंगी लाश की तरह
गुम हो जाते हैं
मान-अपमान में
और
कभी-कभी
जिस्म से नोच कर
जब जिस्म का कोई हिस्सा
दूर फेंक देना पड़ता है
तब मनुष्य के अर्थ
बदल जाते हैं
ख़ाली-ख़ाली
अकेला मनुष्य
अचानक हो जाता है
बेमतलब

मूल डोगरी से अनुवाद : पद्मा सचदेव