भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

लक्ष्य / कन्धों से मिलते है कंधे

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं,

हम चलते हैं जब ऐसे तो ,दिल दुश्मन के हिलते हैं ,


अब तो हमें आगे बढते है रहना ,

अब तो हमें साथी, है बस इतना ही कहना,

अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना ,

अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना ,


कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं,

हम चलते हैं जब ऐसे तो, दिल दुश्मन के हिलते हैं ,


निकले हैं मैदान पर, हम जान हथेली पर लेकर ,

अब देखो दम लेंगे हम, जाके अपनी मंजिल पर ,

खतरों से हंसके खेलना, इतनी तो हममे हिम्मत है ,

मोड़े कलाई मौत की , इतनी तो हममे ताक़त है ,

हम सरहदों के वास्ते, लोहे की इक दीवार हैं ,

हम दुशमन के वास्ते, होशीयार हैं तैयार हैं ,

अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना ,

अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना ,

कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं,

हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं ,


जोश दिल में जगाते चलो, जीत के गीत गाते चलो,

जोश दिल में जगाते चलो, जीत के गीत गाते चलो,

जीत की तो तस्वीर बनाने , हम निकले हैं अपने लहू से,

हम को उस में रंग भरना है,

साथी मैंने अपने दिल में अब यह ठान लिया है ,

या तो अब करना है, या तो अब मरना है ,

चाहे अंगारें बरसे या बर्फ गिरे ,

तू अकेला नहीं होगा यारा मेरे ,

कोई मुश्किल हो या हो कोई मोर्चा,

साथ हर हाल में होंगे साथी तेरे,

अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना,

अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना ,


कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं,

हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं ,


इक चेहरा अक्षर मुझे याद आता है,

इस दिल को चुपके चुपके वो तड़पाता है,

जब घर से कोई भी ख़त आया है,

कागज़ वो मैंने भीगा भीगा पाया है,

पलकों पलकों पर यादों के कुछ दीप जैसे जलते हैं,

कुछ सपने ऐसे हैं जो साथ साथ चलते हैं,

कोई सपना न टूटे, कोई वादा न टूटे,

तुम चाहो जिसे दिल से वो तुमसे न रूठे,

अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना,

अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना ,


कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं,

हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं ,


चलता है जो यह कारवां , गूंजी सी है यह वादियाँ,

है यह ज़मीन , यह आसमान,

है यह हवा, है यह समां,

हर रास्ते ने, हर वादी ने, हर परबत ने सदा दी,

हम जीतेंगे, हम जीतेंगे , हम जीतेंगे हर बाज़ी,


अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना,

अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना,

कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं,

हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं .....