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लड़की / तसलीमा नसरीन

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लड़की अकेली है
लड़की बुरी तरह से अकेली है ... बहुत अकेली
इस तरह निर्लिप्त
और संसार के सभी कुछ में अपनी उदासीनता के साथ अकेली
इसी तरह निर्वासन झेलती वह बहुत समय से जी रही है
लड़की के ठहरे हुए जल में सिर्फ़ कोलकाता ही लहरें उठाता है
सिर्फ़ कोलकाता ही उसे बार-बार बना देता है नदी
कोलकाता ही कानों में मंत्र देता है कि ख़ुश रहो... सिर्फ़ कोलकाता ही।

कोलकाता की धूल से उस लड़की की देह काली हो गई है
और उस पार उसके मन की आँखों के नीचे
जो कालिख जम गई थी
उसे सोख कर इस कोलकाता ने ही
सब कुछ को कैसा गोरा-उजला बना रखा है
दोनों मिल कर अब संसार के अदेखे रूपों को देख रहे हैं
जो नहीं पा सके उन सुखों को भोग रहे हैं।
कोलकाता को कितनी ही बीमारियों ने घेर रखा है
अभाव हैं कितने ही
फिर भी जादू की तरह जाने कहाँ से
वह हीरे-जवाहरात निकाल लाता है!
वह लड़की कितने ही साल बिना प्रेम के रही
उसे, बिना माँगे ही कोलकाता ने

ढेर-सारा प्यार दे दिया है!

मूल बांग्ला से अनुवाद : उत्पल बैनर्जी