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लड़ाई मैं जां सूं रै गौरी तूं घरां बैठी मौज उड़ाया करिए / मेहर सिंह

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अलग महल में बिना हार-शृंगार के रहने तथा हाथ में बांस लेकर कौवे उड़ाने की सजा दे देता है। अर्सा गुजर गया उधर लंका के राजा रावण से अनबन हो जाती है तथा राजकुमार पवन उनसे युद्ध करने के लिए कूच कर देता है तो क्या कहता है-

लड़ाई मैं जां सूं रै गौरी तूं घरां बैठी मौज उड़ाया करिए।टेक

शान तेरी हिरदे बीच फसी
ज्यान किसी फंदे बीच कसी
इसी घड़ा घड़ाई मैं जा सूं रै गौरी तूं हंस खिल कै बतलाया करिए।

मेरा तेरा बीर मर्द का नाता
लिकड़ग्या बखत फेर हाथ ना आता
उड़ै दुश्मन रहै सै लातम लाता
पड़ा पड़ाई मैं जां सूं रै गौरी तूं ब्राहमण सोण जमाया करिए।

बिना धणी उजड़ज्या खेती,
फेर रहज्या रेती की रेती,
उड़ै जा कै दुश्मन सेती
भिड़ा भिड़ाई मैं जां सूं रै गौरी तूं कुछ पुन मैं पीसा लाया करिए।

तूं बंध जाईए धर्म कै डोरै
दिन कटज्यागें गुप्त मसोरै
गुरु लखमीचन्द कै धोरै
जड़ा जड़ाई मैं जां सूं गौरी तूं मेहर सिंह से छन्द गाया करिए।