भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

लता (हाइकु) / भावना कुँअर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

(लता)
सकुचाई -सी
 लिपटती ही गई
 लता पेड़ से
 (याद)
यादों के मेले
हैं अब साथ तेरे
 नहीं अकेले


(मिलन )
महका गया
मेरा तन-मन ये
 तेरा मिलन

(स्नेह रंग)
स्नेह का रंग
बरसे कुछ ऐसे
 छूटे ना अंग

(विदा की घड़ी)
सुबक पड़ी
कैसी थी वो निष्ठुर
 विदा की घड़ी