भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

लम्बी ख़ामोश राहों से / मरीना स्विताएवा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

लम्बी ख़ामोश राहों में
लम्बे ख़ामोश क़दमों से...
हृदय जैसे पानी में फेंका पत्थर
फैलती
और अधिक फैलती
लहरों के बीच...

वह गहरा जैसे पानी, अंधकार भरा जैसे पानी ।
हमेशा के लिए सुरक्षित छाती के भीतर हृदय,
वहाँ से मुझे निकालना है उसे बाहर,
मैं कहना चाहती हूँ उससे
आओ वापिस अब मेरी छाती में ।

रचनाकाल : 27 अप्रैल 1920

मूल रूसी भाषा से अनुवाद : वरयाम सिंह