भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

लोसर की शुभकामनाएँ/ तेनजिन त्सुंदे / अशोक पांडे

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तासी देलक[1]
हालाँकि किराये के एक मकान में
तुम बड़ी हो रही हो
अच्छे से बड़ी हो रही हो, बहना !

इस लोसर[2]
जब तुम सुबह की प्रार्थना में जाओ
तो एक प्रार्थना और करना
कि अगला लोसर हम मन सकें ल्हासा में

जब तुम अपने कॉन्वेंट की कक्षा में पढ़ रही होओ
एक पाठ और सीखना
जिसे तुम वापस जा कर तिब्बत के बच्चों को पढ़ा सको

पिछले साल
हमारे शुभ लोसर के दिन
मैंने इडली साम्भर का नाश्ता किया था
और बी० ए० फ़ाइनल का परचा दिया था
दाँतेदार अल्युमिनियम के मेरे काँटे में
ठीक से नहीं अटक पा रही थी इडलियाँ
अलबत्ता मेरा इम्तिहान अच्छा हुआ

हालाँकि किराये के एक मकान में
तुम बड़ी हो रही हो,
अच्छे से बड़ी हो रही हो, बहन

अपनी जड़ों को भेजना
ईंटों
पत्थरों, टाइलों और बालू के पार
पसार लेना अपनी टहनियों को

और उठाना ऊँचे
बाड़ से ऊपर ऊँचे
तासी देलक

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अशोक पांडे

शब्दार्थ
  1. नववर्ष पर किया जाने वाला तिब्बती अभिवादन
  2. फ़रवरी या मार्च में पड़ने वाला तिब्बती नववर्ष