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लोहे के पिंजरे में शेर / नाज़िम हिक़मत

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लोहे के पिंजरे में सिंह को देखो
देखो, उसकी आँखों को गौर से
मानो लोहे के दो नग्न खंजर
क्रोध से तमतमाते हों

किन्तु क्रोध में होने पर भी
वह कभी अपनी गरिमा नही खोता
आता और जाता है
जाता और आता रहता है

तुम उसके घने मुलायम अयालों में
पट्टे के लिए तनिक-सी भी जगह नही ढूँढ़ सकोगे
जबकि चाबुक के गहरे निशान
उसकी पीली पीठ पर अभी तक दिखाई देते होंगे
उसकी लम्बी टाँगें तनाव से अकड़ती होंगी और
दो ताम्बई पंजें के आकार में दम तोडती होंगी

उसकी गर्दन के बाल
गर्व से तने मस्तक पर एक-एक कर उठते हैं
उसकी नफ़रत
आती है और जाती है
जाती है और आती है

तहख़ाने की दीवार पर
मेरे भाई की परछाईं चलती मालूम होती है
ऊपर से नीचे की ओर जाते
और नीचे से ऊपर की ओर

अंग्रेज़ी से अनुवाद : नीता पोरवाल