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वक़्त से अच्छा कोई मरहम नहीं / शेष धर तिवारी

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वक़्त से अच्छा कोई मरहम नहीं
आंसुओं जैसा कोई हमदम नहीं
 
क्या जरूरी है मुनव्वर हम भी हों
रोशनी सूरज की सर पे कम नहीं
 
लूट कर हमको हँसे मुह फेर जो
वो हमारा कायदे आज़म नहीं
 
सेंक मत रोटी सियासत दान अब
तू हमी से है कि तुझसे हम नहीं
 
शान्ति तो हो पर न हो शमसान सी
चेहरों पर अब हो खुशी , मातम नहीं