भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

वर्षा गीत / बालकृष्ण काबरा 'एतेश' / लैंग्स्टन ह्यूज़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चूमने दो
बारिश को तुम्हें
गिरने दो
अपने सिर पर
बारिश की रजत-बूँदें
गाने दो
बारिश को अपने लिए एक लोरी

बारिश बनाती है
फुटपाथ पर शान्त डबरे
बारिश से
डबरे बहते हैं गटर में
बारिश गाती है
मानो निद्रा-गीत रात में
हमारी छत पर

और
मुझे प्यार है
बारिशों से।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : बालकृष्ण काबरा ’एतेश’