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वह शख़्स जैसाकि उसका सोचना था / निकानोर पार्रा / उज्ज्वल भट्टाचार्य

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वह शख़्स जैसाकि उसका सोचना था
एक हवेली में रहता है जैसाकि उसका सोचना था
पेड़ों के बीच जैसाकि उसका सोचना था
एक नदी के किनारे जैसाकि उसका सोचना था

दीवारों पर जैसाकि उसका सोचना था
पुरानी पेण्टिंग्स टँगी थी जैसाकि उसका सोचना था
न पटने वाली दरारें जैसाकि उसका सोचना था
दुनिया की तस्वीरें जैसाकि उसका सोचना था
अलग-अलग जगह और समय जैसाकि उसका सोचना था

तीसरे पहर को जैसाकि उसका सोचना था
वह सीढ़ियों से चढ़ता है जैसाकि उसका सोचना था
और बालकोनी में जाता है जैसाकि उसका सोचना था
दूर-दूर तक देखने के लिए जैसाकि उसका सोचना था
वादियाँ जैसाकि उसका सोचना था
पहाड़ों से घिरी हुई जैसाकि उसका सोचना था

साये जैसाकि उसका सोचना था
रास्ते से चले आते हैं जैसाकि उसका सोचना था
गाना गाते हुए जैसाकि उसका सोचना था
ढलते सूरज के तले जैसाकि उसका सोचना था

और रात को जब चान्द उगता था जैसाकि उसका सोचना था
वह उस औरत का सपना देखता है जैसाकि उसका सोचना था
जिसने उस पर प्यार बरसाया जैसाकि उसका सोचना था
पुराना दर्द फिर से जाग उठता है
वही पुरानी ख़ुशी जैसाकि उसका सोचना था
और उसका दिल फिर से धड़कने लगता है
एक आदमी का दिल जैसाकि उसका सोचना था

अँग्रेज़ी से अनुवाद : उज्ज्वल भट्टाचार्य