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विलग करो वसन / निज़ार क़ब्बानी

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विलग करो
वसन निज देह से
शताब्दियों से
किसी चमत्कार ने
स्पर्श नहीं किया इस पृथ्वी का
सो, विलग करो
निज वसन निज देह से ।

मैं हो चुका हूँ मूक
किन्तु तुम्हारी काया को
पता है संसार की सभी भाषाएँ
सो, विलग करो
सब वसन निज देह से ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह