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|रचनाकार=अज्ञात
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{{KKLokGeetBhaashaSoochi
|भाषा=भोजपुरी
<poem>
कैसे खेले जइबू सावन में कजरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी<br>
तू तौ जात हौ अकेली
कौनो संग न सहेली
गुण्डा रोकि लींहें तोहरी डगरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी<br>
भौजी बोलेलू तू बोली
सुनिके लागल हमरा गोली
काहे पड़ल बाड़ू हमरी नगरिया
बदरिया घेरि आइल ननदी<br>
केतने दामुल फाँसी चढ़िगे
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