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बताता हूँ, जिला सुपौल का हूँ
तो पूछते हैं लोग- : यह बिहार में कहाँ है?कोसी-कछार कहनेयामधेपुरा का पड़ोसी कहने सेखुलती है इसकी पहचान !
क्या सुपौल की अपनी कोई पहचान नहीं है !!?
क्या सुपौल की मिटटी मिट्टी पैदा न कर सकीकोई झमटगर गाछ ?
कोसी बहा ले गयी उसे या
उखाड़ कर उड़ा ले गयी मधेपुरा की गर्म हवा ?क्या सुपौल की मिट्टी कभी चढ़ी नहीं चाक पर ?गढ़ा न गया कोई बेज़ोर शिल्प याहमने ही उपेक्षा की शिल्प और शिल्पकार की ?
क्या सुपौल की मिट्टी कभी चढ़ी नहीं चाक पर?गढ़ा न गया कोई बेजोड़ शिल्प याहमने ही उपेक्षा की शिल्प और शिल्पकार की? सुपौल को यह क्या होता जा रहा है !!
कोसी काटती ही जा रही है किनारे की जमीन
यहाँ उगने लगी हैंकई किसिम की ज़हरीली जहरीली घासेंयहाँपनपने लगे हैं छोटे-छोटे गढ़ मठ*
चेतना तो कभी थी ही नहीं
अब विस्मृति भी फैलती जा रही है
सोचता हूँ ; सुपौल को जानने लगेंगे लोग
जब यह कोसी या मधेपुरा हो जाएगा !लेकिन तब यह बताते हुए कि जिला सुपौल का हूँ
आँखें कोसी हो जाया करेंगी
और चेहरा मधेपुरा !!
 '''[''*साभार मुक्तिबोध की कविता से लिए गए शब्द।'' ]'''
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