भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

Changes

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुकद्दमा / कविता भट्ट

1,702 bytes added, 12:04, 15 अगस्त 2019
<poem>
अरे साहेब! '''एक मुकद्दमा तो उस शहर पर भी बनता है'''जो हत्यारा है– सरसों में प्रेमी आँख-मिचौलियों का और उस उस मोबाइल को भी घेरना है कटघरे में जो लुटेरा है– सरसों सी लिपटती हँसी-ठिठोलियों का हाँ- उस एयर कंडीशन की भी रिपोर्ट लिखवानी हैजो अपहरणकर्त्ता है- गीत गाती पनिहारन सहेलियों काऔर उस मोबाइल को भी सीखचों में धकेलना हैजो डकैत है- फुसफुसाते होंठों-चुम्बन-अठखेलियों का उस विकास को भी थाने में कुछ घंटे तो बिठाना हैजिसने गला घोंटा; बासंती गेहूं-जौ-सरसों की बालियों का;लेकिन इनका वकील खुद ही रिश्वत ले बैठा हैफीस इनसे लेता है; और पैरोकार है शहर की गलियों काओ साहेब! आपकी अदालत में पेशी है इन सबकी कुछ तो हिसाब दो -उन मारी गयी मीठी मटर की फलियों का -0-
</poem>