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विश्वास / सांवर दइया

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अकुलाई आंखें
स्तब्ध चेहरे
कान : आकाशवाणी प्रसारण पर
कलेजे बेधती शोक धुन

सत्य स्वीकारने को
तैयार नहीं सांसें
हुआ है
फिर भी यही कहते लोग-
   यह नहीं हो सकता !

हुए को नकारते लोगों का
अटूट विश्वास
अटूट विश्वास रखने वालो-
किस मुंह से कहूं तुम्हें
कि कहीं धज्जी-धज्जी कर
   उड़ा दिया गया है विश्वास !