भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

वो कहते हैं यकीं लाना पड़ेगा / मेला राम 'वफ़ा'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

वो कहते हैं यकीं लाना पड़ेगा
ये धोखा जान कर खाना पड़ेगा

ज़माने को बदलना हम ने ठाना
ज़माने को बदल जाना पड़ेगा

सलामत है हमारा जज़्बे-उल्फ़त
तुम आओगे तुम्हें आना पड़ेगा

यही मर्ज़ी है उस आरामे-जां की
हमें अब जान से जाना पड़ेगा

दिले-नादां समझ जायेगा लेकिन
दिले-नादां को समझाना पड़ेगा

अदू के नाज़ उठते कौन देखे
तिरी महफ़िल में उठ जाना पड़ेगा

नहीं ऐ संग-दिल हां वो नहीं तू
किए पर जिस को पछताना पड़ेगा

बड़ा बद-राह है चरख़े-सितमगर
इसे अब राह पर लाना पड़ेगा

पड़ा है ऐ 'वफ़ा' पाला बुतों से
ख़ुदा को दरमियाँ लाना पड़ेगा।