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वो भी अताये-दोस्त है, यह भी उसी की देन है / सीमाब अकबराबादी

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वो भी अताये-दोस्त है, यह भी उसी की देन है।
ऐश में क़हक़हे लगा, तैश में मुसकराये जा॥


याद पै तेरी मुन्हसिर है, यह हयाते-मुख़्तसिर।
मुझ को न याद कर मगर, तू मुझे याद आये जा॥