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शायद हमारे पास वक़्त है / पाब्लो नेरूदा / विनोद दास

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शायद हमारे पास अभी भी वक़्त है
सही होने और सही बन पाने के लिए
गई रात सच की मौत हो गई
एक सबसे ज़्यादा बेवक़्त मौत
यूँ तो इसे हर कोई जानता है
लेकिन सब ऐसे बन रहे हैं गोया इसे जानते नहीं
किसी ने भी उसे फूल नहीं भेजे
अब यह मर चुका है और कोई नहीं रोता

दफ़न होने के ज़रा-सा पहले
दुःख और भूलने के दरम्यान
हो सकता है कि हमारे पास मौक़ा हो
हमारी ज़िन्दगी और मौत का
गली-गली घूमने का
एक समुद्र से दूसरे समुद्र जाने का
एक बन्दरगाह से दूसरे बन्दरगाह जाने का
एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ जाने का
और इन सबके अलावा हर एक आदमी के पास जाने का
यह पता लगाने के लिए कि क्या इसे हमने मारा है
या दूसरे लोगों ने यह किया है
अगर हमारे दुश्मनों ने या हमारे अज़ीज़ों ने यह जुर्म किया है
जिसकी वज़ह से सच की मौत हुई है
तो हम अभी भी इंसाफ़ पसन्द द हो सकते हैं

सन्दिग्ध क्षमता वाले हथियारों से जँग लड़ने
और अपने को घायल करने के पहले
हम भूल गए
कि हम किस ख़ातिर लड़ रहे थे
हमें यह तक पता नहीं था
कि वह किसका ख़ून था जिसने हमें कफ़न ओढ़ाया था
हमने बेहिसाब आरोप लगाए
बेहिसाब आरोप हम पर लगे
उन्होंने तकलीफ़ सही, हमने तकलीफ़ सही
और आख़िर में वे जीत गए
और हम भी जीत गए
सच की मौत हो चुकी थी
हिंसा या पुरानी उम्र के लिए
अब करने को कुछ बाक़ी नहीं है
हम सब जँग हार चुके हैं

लिहाज़ा मेरा ख़याल है कि शायद
अन्त में हम इंसाफ़ पसन्द हो सकते हैं
या अन्त में हम कम से कम अपने वजूद में रह सकते हैं
हमारे पास यह आख़िरी लम्हा है
और फिर कभी ऐसा मौक़ा न मिलेगा
अपने होने के लिए, वापसी के लिए

अँग्रेज़ी से अनुवाद : विनोद दास