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शुरूआत / स्वप्निल श्रीवास्तव

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जिस दिन अर्जुन ने चिडिया की आँख पर निशाना लगाया था
उसी दिन हिंसा की शुरूआत हो गई थी ।
द्रौपदी को द्यूत क्रीड़ा में हार जाने के बाद यह तय हो
गया था कि स्त्री को दाँव पर लगाया जा सकता है ।
चीरहरण को चुपचाप देखनेवाले धर्माचार्य और बुद्धिजीवी
इतिहास में अपनी भूमिका संदिग्ध कर चुके थे ।
यह स्त्री अपमान की पहली घटना थी ।

धृतराष्ट्र किसी राजा का नाम नही एक अन्धे नायक
का नाम है जिसने पुत्रमोह में युद्ध को जन्म दिया था
युद्ध के बाद बचते है शव विधवायें अनाथ बच्चे और
इतिहास के माथें पर कुछ कलंक
अन्त में विजेताओं को बर्फ़ मे गलने के लिए
अभिशप्त होना पडता है ।