भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

श्रमिक / धीरेन्द्र अस्थाना

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

लफ्ज़ दर लफ्ज़
ज़िन्दगी जीता
कभी धरती के सीने को
फाड़कर उगाता जीवन;

पहाडों को फोडकर;
निकालता नदियाँ ।

जिसकी पसीने की
हर एक बूँद दर्शन का
ग्रन्थ रचती ।

उसके जीवन का
हर गुजरता क्षण
ऋचाएँ रचता;

हर सभ्यता का निर्माता
तिरष्कृत और बहिष्कृत
ही रहा सदियों से।