भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

श्वेत है हिम लेकिन उसका भाग्य अश्वेत / काएसिन कुलिएव / सुधीर सक्सेना

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिमाच्छादित दर्रों में ठिठुर जाएगी चिड़िया
मुमकिन है हिमलव गिरे और जम जाए
बर्फ़ उसे जकड़ ले और उसे मुक्ति न मिले
कितने कसाले हैं नन्हीं चिड़ियों के लिए जाड़े में ।

ढलानों पर पत्थरों व चट्टानों के बीच उगती है घास
लेकिन गुस्सैल तूफ़ानों से उसे निजात नहीं
बर्फ़ीली हवा और ओले उसे बख़्शेंगे नहीं
कितना दुष्कर है ऐसे में पहाड़ी घास होना ।

शुभ्र हिम भयभीत है चक्कों और पदचिह्नों से
सूर्य चमका नहीं कि वह आँसुओं में बह निकली
श्वेत है हिम लेकिन उसका भाग्य अश्वेत
दुष्कर हो सकता है ऐसे में हिम होना ।

शीत में बर्फ़ तले बहती है नदी
बन्द और नियन्त्रित है नदी, गो बर्फ़ ज़्यादा नहीं पिघलेगी
ऐसे में बहने को एड़ी-चोटी एक करती रहेगी बेचारी नदी
कितना दुष्कर है ऐसे में बर्फ़ ढँकी नदी होना ।

लेकिन ख़ुश है चिड़िया, अगर वह उड़ान पर है,
और ख़ुश है नदी, अगर वह उन्मुक्त बह रही है,
और ख़ुश है घास, अगर वह बेरोक उग रही है,
और ख़ुश है हिम — कि वह चान्दी-सी चमचमा रही है ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुधीर सक्सेना