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संतर्या वे रस देया भरया / पंजाबी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

संतर्या वे रस देया भरया,
माही गंगा दे राह विच लड्या,
के एत्थों दिल सड़या,
वन्जारेया, वारी मेरी जाण,
 लगें पियारेया।

संतरा ते फुट्टियाँ फुट्टियाँ,
माही दफ्तरों मंगियाँ छुट्टियाँ,
के छुट्टी नहियों मिलदी,
वनजारेया, वारी मेरी जाण,
लगें पियारेया।

संतरा ते रस पयी चोवे,
माही भरी कचेहरी रोवे,
के छुट्टी नहियों मिलदी,
वनजारेया, वारी मेरी जाण,
लगें पियारेया।

तेरे भाइयाँ ने वण्ड लए भांडे,
न जावीं बिशार्मा लेणे,
के इको भांडा आउगा,
वनजारेया, वारी मेरी जाण,
लगें पियारेया।

सानु इको भांडा बथेरा,
थाल मेरा ते कौल तेरा,
ते काके दी गिलासी आ,
वनजारेया, वारी मेरी जाण,
लगें पियारेया।

तेरे भाइयां ने वण्ड लए मकान,
न जावीं बिशार्मा लेणे,
के इको मकान आउगा,
वनजारेया, वारी मेरी जाण
लगें पियारेया।

सानु इको मकान बथेरा,
कमरा तेरा ते हाल मेरा
ते काके दी कोठी आ,
वनजारेया, वारी मेरी जाण
लगें पियारेया।

तेरे भाइयां ने वण्ड लए गहने
न जावीं बिशरमा लेणे
के इको गहना आउगा,
वनजारेया, वारी मेरी जाण
लगें पियारेया।

सानु इको गहना बथेरा
छाप मेरी ते हार तेरा,
ते काके दी जंजीरी आ
वन्जारेया वारी मेरी जान
लगें पियारेया।