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सजधज आयी आ सिणगारी सिंझ्या / सांवर दइया

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सजधज आयी आ सिणगारी सिंझ्या
रातवासै री करै तैयारी सिंझ्या

अंग-अंग सूं छळकै जोबन-मदवो
खोली ठगी री दुकानदारी सिंझ्या

देख्यां जावो घड़ी-घड़ी बदळैला
गजबण-कामेतर-छळगारी सिंझ्या

सूरज नै लेय’र समंदर में लुकगी
करगी आ चोट भळै भारी सिंझ्या

रात नै पजा आप न्हाठ जावैला
जाणै सगळी दुनियादारी सिंझ्या