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सत्य को पाने में मुझे अपनी दुर्गति चाहिए / देवी प्रसाद मिश्र

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औरों की मैं नहीं जानता
लेकिन मेरा काम अर्णव गोस्वामी के बिना चल जाता है
सत्य को पाने में मुझे अपनी दुर्गति चाहिए —
आइंस्टीन का बिखराव जिसमें बाल भी शामिल हों तो क्या हर्ज़
चे का चेहरा और स्टीफ़न हाकिंग का शरीर
फ़ासबिण्डर की आत्मा और ऋत्विक घटक का काला-सफ़ेद
मैं अपने प्रतिभावान होने का सर्वेक्षण कुछ दिनों के लिए टाल रहा हूँ —
बचे समय में मैं अपने दुस्साहस से काम चला लूँगा और असहमति से
मैं अपने काव्य-पाठ में खाली हॉल से आश्वस्त हुआ
इस्मत-चुग़ताई की अन्त्येष्टि में तीन लोग थे
रघुवीर सहाय के दाह-संस्कार में कुछ ज़्यादा थे
मैं भी था लेकिन मुझे लोग नहीं जानते थे अब भी नहीं जानते
तब फ़ेसबुक नहीं था और अब है तो मुझे उस पर होना नहीं आया
मेरे पास अजीब झुँझलाया चेहरा था
कि जैसे किसी सतत असहमत का आधा अमूर्त चेहरा चारकोल से बनाकर
कलाकार अपनी प्रेमिका के साथ भाग गया हो
जिस समाज में
सनी लियोनी, मोदी और अमिताभ बच्चन के ट्विटर पर सबसे ज़्यादा लाइक-फॉलोवर हों
उसमें रात एक बजे ख़ुद के साथ ख़ुद का होना
और इस बात पर नींद का न आना
कि सिंगापुर में रहने वाला आपका भांजा मोदी समर्थक है काफ़ी अजीब और बियाबान विपक्ष है
मैं अन्दर-अन्दर ही फटती नस से मरूँगा —
यह केवल संकेत है कि कौन किससे मरेगा
मतलब कि संस्कृति मन्त्री अपने भीतर के ज़हर से मरेगा
आइए, अब चलते हुए पूछ ही लेते हैं कि लोग शाहरुख़ ख़ान की फ़िल्में क्यों देखते हैं
और आईपीएल के बीसियों मैच और उनमें फँसा राजीव शुक्ला का बहुत खाया चेहरा
अगर आपको याद हो तो मैंने कई बार कहा है कि कोई भी प्रेम अवैध नहीं होता
और अत्याचारी से घृणा सबसे रोमाण्टिक कार्यभार है
पृथ्वी छोड़ने में मुझे देर हो रही है
लेकिन प्रेमिका का बिस्तर छोड़ने में भी मैं कई तरह के बहाने करता रहा हूँ
चलिए, इस कविता को यहीं ख़त्म मान लें
और मेरे लिए दिल्ली छोड़ने के टिकट का चन्दा इकट्ठा करें
मैं पता नहीं कब से यही सोचे जा रहा हूँ
कि एक फासिस्ट का नाम रमाकान्त पाण्डे कैसे हो सकता है