भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सपने / लैंग्स्टन ह्यूज़ / मणिमोहन मेहता

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ज़रा तबियत से
थामे रहो सपने

यदि मर जाते हैं सपने
तो जीवन
टूटे पँखों वाली
चिड़िया हो जाता है
जो उड़ नहीं सकती।

ज़रा तबियत से
थामे रहो सपने
जब विदा हो जाते हैं सपने
तो जीवन
एक बन्ध्या खेत बन जाता है
बर्फ़ से जमा हुआ।

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : मणि मोहन