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समस्या / सुकुमार राय

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सब लिक्खा है इस पोथी में
दुनिया में जितनी ख़बरें हैं,
सरकारी दफ़्तरख़ानों में किस साहब का
कितना पावर, सब लिक्खा है।

कैसे बनते पुलाव-चटनी,
खाना-पीना, जादू-टोना,
साबुन-स्याही, अंजन मंजन
सब लिक्खा है, पढ़ो औ करो।

पूजा-पाठ, महूरत-साइत,
श्राद्ध-विधि और अन्तर-मन्तर
सब लिक्खा है।

खोज रहा हूँ, नहीं मिल रहा,
कैसे रोकें, कैसे पकड़ें,
अगर किसी दिन
पगला साँड़ तुड़ाकर भागे।

सुकुमार राय की कविता : कि मुस्किल (কি মুস্কিল) का अनुवाद
शिव किशोर तिवारी द्वारा मूल बांग्ला से अनूदित