भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

समुद्र / ओरहान वेली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मैं अपने कमरे में बैठा
समुद्र का किनारा देख रहा हूँ
खिड़की से नहीं देख रहा
बस, जानता हूँ नावें समुद्र में जा रही हैं
उन पर लदे हुए हैं तरबूज

समुद्र मुझे दिखता है
अपने कमरे की छत पर
शीशे की तरह लहराता
और मुझे छेड़ता है

समुद्री काई की गंध
समुद्री किनारे पर खड़ी नौकाओं के तने हुए मस्तूल
समुद्र किनारे रहने वाले बच्चों को
कभी याद नहीं आते

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय