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सर्पेदोन की अन्तयेष्टि / कंस्तांतिन कवाफ़ी / सुरेश सलिल

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ज़ीअस घोर शोक में डूबा हुआ :
वध कर दिया पेत्रोक्लॅस ने सर्पेदोन का
और अब वह व अकियन झपटते हुए
उसकी मृतदेह हथियाने को, अपमानित करने को

किन्तु यह ज़ीअस को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं,
यद्यपि उसी ने वध हो जाने दिया अपने प्रिय बालक का — 
विधि का विधान था — 
किन्तु मरणोपरान्त किंचित् सम्मान तो करना ही होगा उसे उसका !

भेजा भूलोक पर अतः अपोलो को
निर्देश देकर, कि कैसे मृतदेह की परिचर्या हो ।

अपोलो ने आदरपूर्वक उठाई मृतदेह उस वीर की
शोकाभिभूत, उसे ले चला नदी की ओर ।
रुधिर और धूलि को धो-पोछ कर साफ़ किया
गहरे घावों को इस तरह भरा कि उनके चिऍ तक मिट गए,
छिड़कीं सुगन्धियाँ और सुधामृत उस पर
पहनाए झलमल ओलिम्पियाई वस्त्र
त्वचा विरंजित की, मोतिया कंघी से सँवारे स्याह काले केश
फैला कर व्यवस्थित किए सुदर्शन अंग ।

अब यह दीख रहा युवा राजपुरुष, तेजस्वी रथी-सा
पच्चीस-छब्बीस की वयस — 
किसी प्रसिद्ध दौड़ की प्रतिस्पर्धा जीत कर विश्राम करता हुआ
स्वर्णमण्डित रथ उसका — 
वायुवेग से दौड़ते घोड़े रथ के ।

इस प्रकार सब कुछ सम्पन्न कर
बुलाया अपोलो ने निद्रा और मृत्यु की जुगल जोड़ी को
दिया आदेश उन्हें
उसे उसकी राजधानी लीकिया ले जाने का ।

निद्रा और मृत्यु की जुगल जोड़ी
चल पड़ी पैदल पाँव लीकिया की ओर — 
और जब पहुँचे वे राजभवन के द्वार पर
सौंप कर सम्मानित शव
लौट लिए अपने अन्य दायित्व वहन करने ।

जैसे ही शव ले जाया गया राजभवन में
प्रारम्भ हो गया अन्त्येष्टि का दुखद कर्मकाण्ड
जुलूसों, जयकारों और विलापों के साथ
पवित्र कलशों से अनेकविध तर्पण हुए
समयानुरूप भरपूर भव्यता के साथ ।

तदुपरान्त आए अनुभवी कारीगर
और विख्यात शिल्पी
नगर से
समाधि और समाधि-शिला निर्मित करने हेतु ।

[1898]

सर्पेदोन : लीकिया का शासक। त्रोय युद्ध में वह यूनानियों के विरुद्ध लड़ा और पेत्रोक्लॅस के हाथों मारा गया ।
 
अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुरेश सलिल