भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

साधुकी संगत पाईवो / मीराबाई

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

साधुकी संगत पाईवो। ज्याकी पुरन कमाई वो॥ध्रु०॥
पिया नामदेव और कबीरा। चौथी मिराबाई वो॥१॥
केवल कुवा नामक दासा। सेना जातका नाई वो॥२॥
धनाभगत रोहिदास चह्यारा। सजना जात कसाईवो॥३॥
त्रिलोचन घर रहत ब्रीतिया। कर्मा खिचडी खाईवो॥४॥
भिल्लणीके बोर सुदामाके चावल। रुची रुची भोग लगाईरे॥५॥
रंका बंका सूरदास भाईं। बिदुरकी भाजी खाईरे॥६॥
ध्रुव प्रल्हाद और बिभीषण। उनकी क्या भलाईवो॥७॥
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। ज्योतीमें ज्योती लगाईवो॥८॥