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सिलवट रहित / रित्सुको कवाबाता

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मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: रित्सुको कवाबाता  » सिलवट रहित

दादी माँ के हाथ पर झुर्रियां हैं
ध्यान से देखती हूँ अपना हाथ
"ओह मेरा,इस पर भी हैं झुर्रियां! "
गहरी झुर्रियां
हर जोड़ पर
हो जाती हैं गायब जब करती हूँ बंद हाथ .
"त्वचा सिलवट रहित है "
त्वचा लपटी है मेरे हाथ पर
मात्र एक त्वचा लिपटी है हाथ पर !
जब मैं पलटती हूँ अपना हाथ
मेरी हथेली लगती है सपाट
जोड़ों पर हैं रेखाएं !
हतप्रभ मैं सोचती हूँ
मेरे हाथ की सतह
कोमल है और पतली !
यह एक सार है सिलवट रहित !

अनुवादक: मंजुला सक्सेना