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सीने में उन के जलवे छुपाये हुये तो हैं / मजाज़ लखनवी

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सीने में उन के जलवे छुपाये हुये तो हैं|
हम अपने दिल को तूर बनाये हुये तो हैं|

[तूर=पहाड]

तासीर-ए-जज़्ब-ए-शौक़ दिखाये हुये तो हैं,
हम तेरा हर हिजाब उठाये हुये तो हैं|

[तासीर=नतीज़ा; जज़्बा=अहसास; हिजाब=परदा]

हाँ वो क्या हुआ वो हौसला-ए-दीद अहल-ए-दिल,
देखो न वो नक़ाब उठाये हुये तो हैं|

[हौसला-ए-दीद=देखने की हिम्मत]

तेरे गुनाहाअर गुनाहगार ही सही,
तेरे करम की आस लगाये हुये तो हैं|

अल्लाह रे क़ामयाबी-ए-आवारगान-ए-इश्क़,
ख़ुद गुम हुये तो क्या उसे पाये हुये तो हैं|

ये तुझ को इख़्तियार है तासीर दे न दे,
दस्त-ए-दुआ हम आज उठाये हुये तो हैं|

[इख़्तियार=cओन्त्रोल; तासीर=नतीज़ा; दस्त-ए-दुआ=प्रार्थना में हाथ उठाना]

मिटते हुओं को देख के क्यों रो न दें 'मज़ाज़',
आख़िर किसी के हम भी मिटाये हुये तो हैं|