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सीसोद्यो रूठ्यो तो म्हांरो कांई कर लेसी / मीराबाई

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राग पहाड़ी

सीसोद्यो रूठ्यो तो म्हांरो कांई कर लेसी।
म्हे तो गुण गोविन्द का गास्यां हो माई॥
राणोजी रूठ्यो वांरो देस रखासी,हरि रूठ्या किठे जास्यां हो माई॥
लोक लाजकी काण न मानां,निरभै निसाण घुरास्यां हो माई॥
राम नामकी झाझ चलास्यां,भौ-सागर तर जास्यां हो माई॥
मीरा सरण सांवल गिरधर की, चरण कंवल लपटास्यां हो माई॥

शब्दार्थ :- सीसोद्यो =शीशोदिया, आशय है यहां राणा भोजराज से, जो मेवाड़ के महाराणा सांगा के ज्येष्ठ राजकुमार थे, इन्हीं के साथ मीराबाई का विवाह हुआ था। रूठ्यौ = रूठ गया। कांई कर लेसी = क्या कर लेगा, म्हे = मैं। गास्यां =गाऊंगी माई = सखी। किठे = कहां। काण =मर्यादा। निसाण =नगाड़ा। घुरस्यां =बजावेगी। झाझ =जहाज।